नूह के 600 वें वर्ष (दूसरे महीने, दसवें दिन) में, नूह ने जहाज में प्रवेश किया l (उत्पत्ति 7:4,10,11)
नूह के 600 वें वर्ष (दूसरे महीने, सत्रहवें दिन) में, जल प्रलय शुरू हुआ l (उत्पत्ति 7:11)
जल ने पृथ्वी पर 150 दिनों तक प्रबल रहा (5 महीने, हर महीने 30 दिन के), जिसमें 40 दिन और 40 रात की वर्षा शामिल थीं l (उत्पत्ति 7:12,17,24)
नूह के 600 वें वर्ष (सातवें महीने, सत्रहवें दिन) में, जल घटने लगा l (उत्पत्ति 7:24; 8:1)
जल इतना कम हो गया कि (600 वें वर्ष, सातवां महीना, सत्रहवां दिन) जहाज अरारात नामक पहाड़ पर ठहर गया l (उत्पत्ति 8:3,4)
जल कम होना जारी रहा (600 वें वर्ष, दसवां महीना, पहला दिन) ताकि पहाड़ों की चोटियाँ दिखाई दे l (उत्पत्ति 8:5)
चालीस दिन बाद (600 वें वर्ष, ग्यारहवां महीना, दसवां दिन) नूह ने एक कौवा और एक कबूतर को भेजा (उत्पत्ति 8:6)। अगले 14 दिनों में, नूह ने दो और कबूतर भेजे (उत्पत्ति 8:10,12)। कुल मिलाकर इसमें 61 दिन या दो महीने और एक दिन का समय लगा।
नूह के 601 वें वर्ष तक पहले महीने, पहले दिन, जल सूख गया था l (उत्पत्ति 8:12,13)
नूह ने उतरने से पहले एक महीने और छब्बीस दिन तक प्रतीक्षा की, अपने 601 वें वर्ष के दूसरे महीने 27 वें दिन तक l जल प्रलय शुरू से अंत तक एक वर्ष और दस दिनों तक चला (उत्पत्ति 7:11 से उत्पत्ति 8:14)।
स्रोत: मैकआर्थर स्टडी बाइबल, जॉन मैकआर्थर द्वारा।
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